Saturday, December 22, 2018

``सच्ची हिक़ायत`` [पोस्ट-01]

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!!..रसुलल्लाह ﷺ का पैगाम एक मजूसी के नाम..!!
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♥शीराज के एक बुजुर्ग हजरत फाश फरमाते हैं कि मेरे यहां एक बच्चा पैदा हुवा !
मेरे पास खर्च करने के लिए कुछ भी न था ! वह मौसम इन्तीहाइ सर्द था, मै इसी फिक्र मे सो गया तो ख्वाब मे हुजूर ﷺ की ज्यारत नसीब हुइ !
आपने फरमाया : कया बात हैं??
●मैने अर्ज किया : हुजुर खर्च के लिए मेरे पास कुछ भी नही ! बस इसी फिक्र मे था,
हुजूर ﷺ ने फरमाया : दिन चढ़े तो फला मजूसी के घर जाना और उस से कहना की रसुललल्लाह ﷺ ने तुझे कहा है की बिस दिनार तुझे दे दे,

हजरत फाश सुबह उठे तो हैरान हूए की एक मजूसी के घर कैसे जाऊं और रसुललल्लाह का हुक्म वहां कैसे सुनाऊं ??
फिर यह बात भी दूरूस्त है की ख्वाब मे हुजूर नजर आये तो वह हुजूर ही होते हैं !
इसी शश-व-पंज मे वह दिन भी गुजर गया !
●दुसरी रात फिर हुजुर कि ज्यरत हुई !
हुजुर ﷺ ने फरमाया : तुम इस ख्याल को छोड़ दो और उस मजूसी के पास मेरे पैगाम पहुंचा दो !
●चुनांचे हजरते फाश सुबह उठे और उस मजूसी के घर चल पड़े। क्या देखते है की वह मजूसी अपने हाथ मे कुछ लिए हुए दरवाजे पर खड़ा है !
जब उनके पास पहुंचा तो (चुकी वह उनको जानता न था ! यह पहली मर्तबा उनके पास आए थे) इस लिए शर्मा गये !
●वह मजूसी खुद ही बोल पड़ा बड़े मियां ! कया कुछ हाजत है ??
•हजरत फाश बोले हां! मुझे रसुललल्लाह ﷺ ने तुम्हारे पास भेजा है कि तुम मुझे बिस दिनार दे दो !
●उस मजुसी ने अपना हाथ खोला और कहे ले लिजीए ! यह बिस दिनार मैने आप ही के लिए निकाल कर रखे थे ! आपकी राह देख रहा था!
●हजरत फाश ने वह दिनार लिए और उस मजूसी से पुछा भाइ तो भला रसुललल्लाह ﷺ को ख्वाब मे देखकर यहां आया हूं ! मगर तुझे कैसे मेरे बारे मे कैसे इल्म हो गया??

●वह बोला रात को इस शक्ल व सुरत के एक नुरानी बुजूर्ग को ख्वाब मे देखा है जिन्होने फरमाया की एक शख्स
साहिबे हाजत है और वह कल तुम्हारे पास पहुंचेगा उसे दिनार दे देना !
●चुनांचे मै यह बिस दिनार लेकर तुम्हारा ही इन्तेजार मे था
हजरत फाश ने जब उसकी जबानी रात को मिलने वाले नुरानी बुजुर्ग का हुलीया सुना तो वह हुजूर ﷺ का था,
चुनांचे हजरत फाश ने उससे कहा की यही हुजूर ﷺ हैं! वह मजूसी यह वाकिया सुनकर थोड़ी देर ठहरा और फिर कहा मुझे अपने घर ले चलो !
●चुनांचे वह हजरत फाश के घर आया और कलीमा पढ़कर मुस्लमान हो गया फिर उसकी बिवी बहन और उसकी औलाद भी मुस्लमान हो गया, !!!!!!!!
{शवहिदुल हक सफा-166}
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सबक,
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हमारे हुजूर ﷺ की नजरे रहमत जिस पर पड़ जाये उसका बेड़ा पार हो जाता है!
यह भी मालूम हुवा कि हुजूर ﷺ अपने मोहताज गुलामो कि फरियाद सुनते है और विसाल शरिफ के बाद भी मोहताजो की मदद फरमाते है,,,,,,

Friday, December 21, 2018

-::अनमोल मोती-01::-

(1)- हज़रात अली (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) फरमाते है
“आंसू और मुश्कान दो अनमोल खज़ाना है. आंसू को अपने तक महदूद रखो और मुश्कान को लोगो पर लुटा दो।”
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(2)-हज़रत लुक़्मान फरमाते है के अगर अमन चाहते हो तो कान और आँखों का इस्तेमाल करो और ज़ुबान बन्द रखो. पहले सोचो और फिर बोलो।
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 (3)-अमीर इतना बनो के आप कितनी भी कीमती चीज़ चाहो खरीद सको, लेकिन कीमती इतने बनो के इस दुनीयां का कोई आमिर से आमिर भी आपको खरीद न सके.।
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 (4)-किसी को पाने की तमन्ना न करो बल्कि तुम खुद उसके काबिल हो जाओ के लोग तुम्हे पाने की तमन्ना करे।
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(5)- रिश्ते तो ताजमहल की तरह होते है. सबको उसकी खूबसूरत तो दिखाई देती है मगर उसको बनाने में लगा वक्त नज़र नहीं आता।
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(6)- इंसान तीन चिजोसे महरूम रहेगा.
1. गुस्से वाला सही फैसले से.
2. झुठा इज़्ज़त से.
 3. जल्दबाज़ कामयाबी से महरूम रहता है.
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(7)-बेशक ! इंसान बड़े कच्चे दिलवाला बनाया गया है. जब इसे मुसीबत पहुंचती है तो घबरा उठता है. और जब राहत मिलती है तो बे-खयाली करने लगता है.।
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 (8)-एक बुज़ुर्ग से पूछा गया के गुस्सा किया है? बहुत खूबसूरत जवाब मिला के किसी की गलती की सजा खुद दो देना।
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(9)-बुरे इन्सान की सोबत से परेज़ करो क्यों की वह तलवार की तरह होती है जो देखने में तो खूबसूरत मगर असर मे खतरनाक होती है.।
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 (10)- जिसने ज़ुबान पर काबू रखा उसने दुनीयां जीत ली. जिस की ज़ुबान से ज़हर निकलता है दुनीयां उसके लिए ज़हर बन जाती है।
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 (11)-इंसान अपना चेहरा सजाता है जिस पर लोगो की नज़र होती है. मगर दिल को सजाने की कोशिश नहीं करता जिस पर रब तबारक व तआला की नज़र होती है.
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 (12)-किसी को परखो मत क्यों के परखने से रिश्ते कमज़ोर हो जाते है.।
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 (13)- दुश्मन से हमेशा बचते रहो और दोस्तो से उस वक्त बचो जब वह तुम्हारी तारीफ करने लगे।
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 (14)- हर किसी की बात मे हां में हां मिलाना मुनिफिको की खसलत है और हर बात में इख़्तिलाफ़ करना बाइसे अदावत है.।
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 (15)-मुसीबत अंधेरे की तरह होती है, और मुसीबतो का सामना करने वाला सितरो की तरह होता है. जब अँधेरा होता है तभी सितारे चमकते है.
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 (16)- तकब्बुर करने वाले और यूही अपना वक्त बर्बाद करने वाले लोग शराब के नशेमे चूर लोगों से भी ज़्यादा देरी से होशमे आते है.
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✒(मोहम्मद समीर अली)

``सच्ची हिक़ायत`` [पोस्ट-01]

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