Tuesday, June 26, 2018

☆नमाज़ की अहमिय्यत... (पोस्ट -02)

नमाज़ की अहमिय्यत और क़ुरआनी आयात...



♥नमाज़ की अहमिय्यत समझने के लिये ये जानना काफी है कि अल्लाह ने क़ुरआन में जितनी ताकीद नमाज़ की फ़रमाई है उतनी ताकीद किसी और बात की नहीं फ़रमाई। अल्लाह का बार बार नमाज़ की ताकीद फरमाना ही उसकी अहमिय्यत को ज़ाहिर कर रहा है। चुनान्चे अल्लाह इर्शाद फ़रमाता है :
     मुसलमान वो है जो ईमान रखते है ग़ैब की बातों पर और नमाज़ कायम करते है और अल्लाह की दी हुई रोज़ी में से उसकी राह में खर्च करते है।
[सूरए बक़रह, 3]

     एक जगह नमाज़ छोड़ने की बुराई का ज़िक्र करते हुए अल्लाह फरमा रहा है :
     नमाज़ क़ायम करो और मुश्रिकों जेसे न बनो।
[सूरए रूम, 31]

     अल्लाह ने नमाज़ को ईमान की अलामत (निशानी) बताया और नमाज़ न पढ़ने को मुश्रिकों की पहचान बताया है उससे बढ़कर नमाज़ की अहमिय्यत समझने के लिये और क्या बात हो सकती है।
[नमाज़ की अहमिय्यत 6]


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