☆नमाज़ की फ़ज़ीलत और क़ुरआनी आयात...#02
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♥नमाज़ की बेपनाह फ़ज़िलतें है जिनसे हर नमाज़ी फ़ैज़याब हो सकता है उन फ़ज़िलतों और फायदों में से एक ये इलाज है। चुनान्चे फ़रमाया गया :
जान लो ! अल्लाह के ज़िक्र ही में दिलों का सुकून है।
[सूरए रअद, 28, पारा 13]
एक और मक़ाम पर अल्लाह ने नमाज़ को हर तरह की बुराई व बे-हयाई से बचने का ज़रिया बताया है।
इर्शाद फ़रमाया : बेशक नमाज़ बे-हयाई और बुराई से रोकती है।
हदिष में आता है कि एक सहाबी से कोई गुनाह सरज़द हो गया, उन्होंने नबी ﷺ की खिदमत में हाज़िर होकर माफ़ी के लिये दरख्वास्त पेश की। इस पर ये आयत नाज़िल हुई :
नमाज़ क़ायम करो दिन के दोनों किनारो और कुछ रात गए बेशक नेकियां बुराईयों को मिटा देती है। ये नसीहत है नसीहत मानने वालों के लिये।
[सूरए अनक़्बूत 45, पारह 21]
पता चला कि नमाज़ की बरकतों से लोगों के गुनाह मिट जाते है।
[नमाज़ की अहमिय्यत 7]
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♥नमाज़ की बेपनाह फ़ज़िलतें है जिनसे हर नमाज़ी फ़ैज़याब हो सकता है उन फ़ज़िलतों और फायदों में से एक ये इलाज है। चुनान्चे फ़रमाया गया :
जान लो ! अल्लाह के ज़िक्र ही में दिलों का सुकून है।
[सूरए रअद, 28, पारा 13]
एक और मक़ाम पर अल्लाह ने नमाज़ को हर तरह की बुराई व बे-हयाई से बचने का ज़रिया बताया है।
इर्शाद फ़रमाया : बेशक नमाज़ बे-हयाई और बुराई से रोकती है।
हदिष में आता है कि एक सहाबी से कोई गुनाह सरज़द हो गया, उन्होंने नबी ﷺ की खिदमत में हाज़िर होकर माफ़ी के लिये दरख्वास्त पेश की। इस पर ये आयत नाज़िल हुई :
नमाज़ क़ायम करो दिन के दोनों किनारो और कुछ रात गए बेशक नेकियां बुराईयों को मिटा देती है। ये नसीहत है नसीहत मानने वालों के लिये।
[सूरए अनक़्बूत 45, पारह 21]
पता चला कि नमाज़ की बरकतों से लोगों के गुनाह मिट जाते है।
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